सृष्टिकर्ता कबीर परमेश्वर
नमस्कार दोस्तों मैं सुमन भाटी क्या आपने कभी सोचा है की सृष्टि का रचयिता कौन है किसने रची थी कैसा है सृष्टि के रचनाहार आज मैं आपको बताऊंगी! संपूर्ण सृष्टि की रचना करने वाला कबीर परमेश्वर है जिन्होंने 6 दिन में सृष्टि रची सातवें में दिन विश्राम किया था हमारे सारे सद्ग्रंथ में प्रमाण है पवित्र चारों वेदों में मुसलमान धर्म की पवित्र कुरान शरीफ में ईसाई धर्म की पवित्र बाइबल में सिख धर्म के पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब में अलग-अलग जगह पर प्रमाणित किया गया है की इस संपूर्ण सृष्टि के सृजनहार कबीर परमेश्वर है,
🌏सृष्टि रचना👇
कबीर परमेश्वर ने सूक्ष्म वेद कबीर वाणी में अपने द्वारा रची गई सृष्टि का ज्ञान स्वयं ही बताया है
👉 सर्वप्रथम केवल एक अनामी लोक था जिसे अकह लोक कहा जाता है, पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब अनामी लोक में अकेले रहते थे उस परमात्मा का वास्तविक नाम कबीर देव है सभी आत्माएं उस पूर्ण धनी के शरीर में समाई हुई थी पूर्ण परमात्मा कबीर देव ने मनुष्य को अपने स्ववरू जैसा बनाया, इसलिए मनुष्य का नाम पुरुष पड़ा अनामी पुरुष के एक रोम कूप का प्रकाश शंख सूर्य की रोशनी से भी अधिक है
👉 कबीर परमेश्वर ने नीचे के 3 अगम लोक अलख लोक सतलोग की रचना शब्दशक्ति से की !
यही पूर्ण ब्रह्म परमात्मा कबीर देव ही अगमलोक में प्रकट हुए तथा कबीर परमेश्वर अगमलोक का भी स्वामी है तथा वहां इनका उपमा त्मक नाम अगम पुरुष है इसी अगम परमेश्वर का मानव सदृश्य तेजोमय शरीर स्वयं प्रकाशित है न एक रोम कूप में खरब सूर्य की रोशनी से भी अधिक प्रकाशमान है यह पूर्ण परमात्मा कबीर देव अलख लोक में सुशोभित है स्वयं की अलख लोक का स्वामी की है एक रूम कूप की रोशनी अरब सूर्य के प्रकार से भी ज्यादा है,
👉पूर्ण परमात्मा सतलोक में प्रकट हुआ और वहां भी एक रोम कूप की रोशनीअसंख्करोड़ सूर्य और चंद्रमा की मिली जुली रोशनी से भी अधिक है इस कविर प्रभु ने सत्पुरुष रूप में प्रकट होकर सतलोक में विराजमान होकर सबसे पहले अन्यलोको की रचना की,
👉 कबीर परमेश्वर ने 16 वचनों से 16 द्वीपों की रचना थी फिर 16 शब्दों से 16 पुत्रों की उत्पत्ति की एक मानसरोवर की रचना की जिसमें अमृत भरा है 16 पुत्रों के नाम कुर्म, विवेक, तेज, सहज, संतोष ,,श्रुति,,आनंद, क्षमा, निष्काम जल रंगी ,अचिंत, प्रेम ,दयाल, धैर्य योग जीत!
👉 पूर्ण परमात्मा कबीर देव ने अपने पुत्र अचिंत को सतलोक के अन्य रचना का भार सौंपा तथा शक्ति प्रदान की अचिंत ने अक्षर पुरुष की शब्द से उत्पत्ति की तथा कहा कि मेरी मदद करना अक्षर पुरुष स्नान करने मानसरोवर पर गया वहां आनंद आया तथा सो गया लंबे समय तक बाहर नहीं आया तब अचिंत की प्रार्थना पर अक्षर पुरुष को नींद से जगाने के लिए कबीर परमेश्वर ने उसी मानसरोवर से कुछ अमृत जल लेकर एक अंडा बनाया तथा उसमें एक आत्मा प्रवेश कर के अमृत जल छोड़ा अंडे की गड़गड़ाहट से अक्षर पुरुष के निंद्रा भंग हुई अंडे को क्रोध से देखा जिस कारण से अंडे के दो भाग हो गए जिसमें से ज्योति निरंजन निकला जो आगे चल काल कहलाया इसका वास्तविक कैल नाम है सत्पुरुष ने आकाशवाणी की आप दोनों बाहर आओ तथा अचिंत के लोक में रहने लगे फिर पूर्ण धनी कबीर परमेश्वर ने स्वयं ही सृष्टि की रचना की!
👉 कबीर परमेश्वर ने अपने शब्द शक्ति से एक राजेश्वरी शक्ति उत्पन्न की जिससे सर्व ब्रह्मांडो को स्थापित किया इसी को परनदनी भी कहते हैं पूर्णब्रह्मा ने सर्व आत्माओं को अपने ही अंदर से अपनी वचन सिद्धि से अपने मानव शरीर सदृश्य उत्पन्न किया प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा शरीर रचा जिसका तेज 16 सूर्यो जैसा मानव सदृश्य है परंतु पूर्ण परमात्मा के शरीर के एक रूम कोप का प्रकाश करोड़ों सूर्य से भी ज्यादा है!
👉 पवित्र बाइबल में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा कबीर देव ने 6 दिन में सृष्टि रची 7वे दिन में दिन सतलोक में सुशोभित सिंहासन पर विराजमान हो गए! !
🌏सृष्टि रचना👇
कबीर परमेश्वर ने सूक्ष्म वेद कबीर वाणी में अपने द्वारा रची गई सृष्टि का ज्ञान स्वयं ही बताया है
👉 सर्वप्रथम केवल एक अनामी लोक था जिसे अकह लोक कहा जाता है, पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब अनामी लोक में अकेले रहते थे उस परमात्मा का वास्तविक नाम कबीर देव है सभी आत्माएं उस पूर्ण धनी के शरीर में समाई हुई थी पूर्ण परमात्मा कबीर देव ने मनुष्य को अपने स्ववरू जैसा बनाया, इसलिए मनुष्य का नाम पुरुष पड़ा अनामी पुरुष के एक रोम कूप का प्रकाश शंख सूर्य की रोशनी से भी अधिक है
👉 कबीर परमेश्वर ने नीचे के 3 अगम लोक अलख लोक सतलोग की रचना शब्दशक्ति से की !
यही पूर्ण ब्रह्म परमात्मा कबीर देव ही अगमलोक में प्रकट हुए तथा कबीर परमेश्वर अगमलोक का भी स्वामी है तथा वहां इनका उपमा त्मक नाम अगम पुरुष है इसी अगम परमेश्वर का मानव सदृश्य तेजोमय शरीर स्वयं प्रकाशित है न एक रोम कूप में खरब सूर्य की रोशनी से भी अधिक प्रकाशमान है यह पूर्ण परमात्मा कबीर देव अलख लोक में सुशोभित है स्वयं की अलख लोक का स्वामी की है एक रूम कूप की रोशनी अरब सूर्य के प्रकार से भी ज्यादा है,
👉पूर्ण परमात्मा सतलोक में प्रकट हुआ और वहां भी एक रोम कूप की रोशनीअसंख्करोड़ सूर्य और चंद्रमा की मिली जुली रोशनी से भी अधिक है इस कविर प्रभु ने सत्पुरुष रूप में प्रकट होकर सतलोक में विराजमान होकर सबसे पहले अन्यलोको की रचना की,
👉 कबीर परमेश्वर ने 16 वचनों से 16 द्वीपों की रचना थी फिर 16 शब्दों से 16 पुत्रों की उत्पत्ति की एक मानसरोवर की रचना की जिसमें अमृत भरा है 16 पुत्रों के नाम कुर्म, विवेक, तेज, सहज, संतोष ,,श्रुति,,आनंद, क्षमा, निष्काम जल रंगी ,अचिंत, प्रेम ,दयाल, धैर्य योग जीत!
👉 पूर्ण परमात्मा कबीर देव ने अपने पुत्र अचिंत को सतलोक के अन्य रचना का भार सौंपा तथा शक्ति प्रदान की अचिंत ने अक्षर पुरुष की शब्द से उत्पत्ति की तथा कहा कि मेरी मदद करना अक्षर पुरुष स्नान करने मानसरोवर पर गया वहां आनंद आया तथा सो गया लंबे समय तक बाहर नहीं आया तब अचिंत की प्रार्थना पर अक्षर पुरुष को नींद से जगाने के लिए कबीर परमेश्वर ने उसी मानसरोवर से कुछ अमृत जल लेकर एक अंडा बनाया तथा उसमें एक आत्मा प्रवेश कर के अमृत जल छोड़ा अंडे की गड़गड़ाहट से अक्षर पुरुष के निंद्रा भंग हुई अंडे को क्रोध से देखा जिस कारण से अंडे के दो भाग हो गए जिसमें से ज्योति निरंजन निकला जो आगे चल काल कहलाया इसका वास्तविक कैल नाम है सत्पुरुष ने आकाशवाणी की आप दोनों बाहर आओ तथा अचिंत के लोक में रहने लगे फिर पूर्ण धनी कबीर परमेश्वर ने स्वयं ही सृष्टि की रचना की!
👉 कबीर परमेश्वर ने अपने शब्द शक्ति से एक राजेश्वरी शक्ति उत्पन्न की जिससे सर्व ब्रह्मांडो को स्थापित किया इसी को परनदनी भी कहते हैं पूर्णब्रह्मा ने सर्व आत्माओं को अपने ही अंदर से अपनी वचन सिद्धि से अपने मानव शरीर सदृश्य उत्पन्न किया प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा शरीर रचा जिसका तेज 16 सूर्यो जैसा मानव सदृश्य है परंतु पूर्ण परमात्मा के शरीर के एक रूम कोप का प्रकाश करोड़ों सूर्य से भी ज्यादा है!




wow..Great knowledge😯👌
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