मगहर में कबीर साहेब ने की अद्भुत लीलाएं
वैसे तो आप सब जानते ही हैं ईश्वर एक है उसी की इच्छा से सर्व ब्रह्माण्डो की रचना और सृष्टि का संचालन हो रहा है परंतु समस्त सद ग्रंथों में सृष्टि के रचयिता पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब है पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब चारों युगों में आये थे, हर युग में अपनी प्यारी आत्माओं से मिलकर तत्वज्ञान समझा कर सतलोक का अधिकारी बनाते हैं आज से 600 वर्ष पहले कभी परमात्मा स्वयं आए थे
आदरणीय गरीबदास जी महाराज
आदरणीय धर्मदास जी
आदरणीय मलूक दास जी
आदरणीय संत पीपा
आदरणीय घिसा दास जी,
आदरणीय नानक साहिब जी
इन प्यारी आत्माओं को कबीर साहिब ने सतलोक दिखाकर अपने तत्वज्ञान समझाया था,
" गरीब सतगुरु पुरुष कबीर है
चारों युग परवान
झूठे गुरुवा मर गए
होगे भूत मसान!!
सतगुरु रामपाल जी महाराज जी* प्रमाणित करके बताते हैं :-
💠मगहर में कबीर साहेब ने की अद्भुत लीला
मगहर में कबीर साहेब के सशरीर सतलोक जाने के बाद उनके हिन्दू और मुस्लिम शिष्यों के बीच विवाद हो गया। मगहर के राजा बिजली खाँ पठान और बनारस के राजा बीर सिंह बघेल के बीच कबीर साहेब के अंतिम संस्कार को लेकर बहुत मतभेद हुआ। लेकिन कबीर साहेब के जाने के बाद चादर के नीचे उनके शरीर के बदले केवल फूल मिले। उसके बाद दोनों धर्म के लोगों ने आधे आधे फूल बाँट लिए
मगहर में कबीर साहेब के सशरीर सतलोक जाने के बाद उनके हिन्दू और मुस्लिम शिष्यों के बीच विवाद हो गया। मगहर के राजा बिजली खाँ पठान और बनारस के राजा बीर सिंह बघेल के बीच कबीर साहेब के अंतिम संस्कार को लेकर बहुत मतभेद हुआ। लेकिन कबीर साहेब के जाने के बाद चादर के नीचे उनके शरीर के बदले केवल फूल मिले। उसके बाद दोनों धर्म के लोगों ने आधे आधे फूल बाँट लिए
💠मगहर लीला
मगहर रियासत के अकाल प्रभावित स्थान में गोरखनाथ जैसे सिद्ध पुरुष भी बारिश करवाने में नाकाम रहे थे। लेकिन परमात्मा कबीर जी ने वहां बारिश करवाकर दिखा दी थी और साबित कर दिया कि वही जगत पालनहार हैं।
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कबीर परमात्मा मगहर से सशरीर सतलोक गए थे!
जिंदा जोगी जगत् गुरु, मालिक मुरशद पीर। दहूँ दीन झगड़ा मंड्या, पाया नहीं शरीर।।
परमात्मा कबीर जी के शरीर को प्राप्त करने के लिए दोनों ही दीन, हिंदू और मुसलमान आपस में झगड़े की तैयारी करके मगहर आए थे लेकिन जब शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल मिले तो दोनों आपस में लिपट लिपट कर रोने लगे।
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परमात्मा का मगहर से सशरीर सतलोक
पंडितों ने गलत मान्यता फैलाई थी की कि काशी में मृत्यु होने से मुक्ति मिल जाती है और मगहर में मृत्यु होने से गधा बनते हैं। लेकिन कबीर साहेब का मानना था कि अगर काशी में ही मुक्ति होती है तो जीवन भर राम-नाम जपने और ध्यान-साधना करने की क्या आवश्यकता। इसलिए कबीर साहेब काशी से मगहर जा पहुँचे।
कबीर साहेब ने अपनी वाणी में भी कहा है की,
"लोका मति के भोरा रे, जो काशी तन तजै कबीरा, तौ रामहि कौन निहोरा रे"
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कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए !
उनके शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल पाए गए जो कबीर परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार दोनों धर्मों ने आपस में लेकर मगहर में 100 फुट के अंतर से एक-एक यादगार बनाई जो आज भी विद्यमान है।
यह दोनों धर्मों हिंदुओं और मुसलमानों में आपसी भाईचारे व सद्भावना की एक मिसाल का प्रमाण है।
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मगहर में सूखी नदी में पानी बहाना
मगहर के समीप एक आमी नदी बहती थी। वह भगवान शंकर जी के श्राप से सूख गई थी। पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब ने उसी समय अपनी शक्ति से उसमें पानी भर चलाया। आज भी आमी नदी प्रमाण के तौर पर बह रही है। फिर परमेश्वर कबीर साहेब हजारों लोगों के सामने से सशरीर सतलोक गये।
परमात्मा कबीर जी चार दाग से न्यारे हैं!
चदरि फूल बिछाये सतगुरु , देखें सकल जिहाना हो । च्यारि दाग से रहत जुलहदी , अविगत अलख अमाना हो ।।
👆 इस तरह से ज्ञान आधार से कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैं,
और अधिक जानकारी के लिए कृपया रोज शाम 7:30 बजे साधना टीवी पर संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन अवश्य सुने!




Nice👌
ReplyDeleteThankuuu
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